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Indigo गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई

 

नई दिल्ली: नागर विमानन महानिदेशालय-डीजीसीए ने इंडिगो के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीटर एल्बर्स और एकाउंटेबल मैनेजर इसीड्रो पोर्क्यूरस को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और बड़े पैमाने पर उड़ाने रद्द होने को लेकर 24 घण्टे के अंदर जवाब देने को कहा है। उड़ानें रद्द होने से यात्रियों को काफी असुविधा और परेशानी हुई।

डीजीसीए ने इसके लिए स्वीकृत उड़ान समय सीमा मानदण्डों के तहत संशोधित जरूरतों के लिए पर्याप्त व्यवस्था न कर पाने के कारण हुए परेशानी के लिए विमानन कम्पनी को जिम्मेदार ठहराया। नोटिस में कहा गया है कि बड़े पैमाने पर उड़ान संचालन में विफलता से योजना और संसाधन प्रबंधन में बड़ी चूक का पता चलता है।
  • दिसंबर 2025 की शुरुआत से IndiGo की घरेलू उड़ानों में गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई। दिल्ली, मुंबई, चेन्नई, बैंगलोर जैसे कई प्रमुख हवाई अड्डों पर यात्रियों की उड़ानें अचानक रद्द हो रही हैं।
  • 6 दिसंबर को लगभग 571 उड़ानें रद्द हो चुकी थीं, जिससे हजारों यात्री फँस गए थे।
  • मुंबई एयरपोर्ट पर 109, दिल्ली पर 86–106, बैंगलोर, हैदराबाद, पुणे, लखनऊ, अहमदाबाद, जयपुर सहित कई शहरों में यात्रियों की उड़ानें प्रभावित हुईं
  • कई यात्रियों को री-शेड्यूलिंग, रिफंड या वैकल्पिक सफर का आश्वासन नहीं मिला, जिसके कारण उन्हें शादी, परीक्षा, ऑफिस, मेडिकल या पारिवारिक काम रद्द करने पड़े।
  • यह घटना क्यों हुई — कारण और जिम्मेदारी नए नियमों में समस्या की मूल है: नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पायलट-क्रू की ड्यूटी और आराम के घंटों, जिसे "फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL)" कहा जाता है, में महत्वपूर्ण परिवर्तन किए हैं। रात की उड़ानों पर प्रतिबंध, पायलटों को अतिरिक्त आराम प्रदान करना और न्यूनतम विश्राम समय जैसे नियम लागू किए गए हैं। हालांकि, IndiGo ने समय पर पर्याप्त पायलट और क्रू रिजनज नहीं की, अर्थात् नई नियमावली के अनुसार स्टाफ नहीं जुटाया। इसलिए जब ये नियम लागू हुए, उनकी उड़ान-निर्धारण पर असर पड़ा। इसके अलावा एयरलाइन ने टेक्निकल गड़बड़, मौसम, ट्रैफिक-कंजेशन आदि को भी वजह बताई है। विलय-कुल व्याख्याओं के बीच, असल हल यह है कि IndiGo अपनी तैयारी में विफल रही।

अब क्या हुआ — यात्रियों, सरकार व न्यायालय की प्रतिक्रिया

    • बड़ी संख्या में प्रभावित यात्रियों की ओर से, 6 दिसंबर 2025 को एक याचिका Supreme Court of India (SC) में दाखिल की गयी है। इस याचिका में मांग की गयी है कि SC स्वतः संज्ञान ले और सरकार व DGCA से पूछे कि यह संकट क्यों हुआ, भविष्य में ऐसा कैसे रोका जाए। यात्रियों के लिए एक “Passenger Protection Framework” बनाए — रिफंड, वैकल्पिक सफर, मेडिकल इमरजेंसी वालों को प्राथमिकता, शिकायत निवारण आदि। 

    • याचिका में विश्लेषकों ने इसे “मानव-कियदनात्मक संकट” (“humanitarian crisis”) कहा है — क्योंकि कई यात्री चिकित्सा, परिवार, काम-काज या अन्य आवश्यक कारणों से उड़ान पर निर्भर थे। उड़ानों रद्द होने से उनकी जिंदगी प्रभावित हुई।सरकार और DGCA ने भी हस्तक्षेप शुरू कर दिया है। रिफंड देने, re-scheduling फ्री करने आदि आदेश दिए गए हैं। अगर IndiGo समय पर रिफंड व सुविधाएं नहीं देती है, तो regulatory action लेने की चेतावनी दी गयी है।

यात्रियों की हालत — कहानियाँ, गुस्सा, मायूसी

      • सोशल मीडिया और रेडिट जैसे प्लेटफार्म पर यात्रियों की शिकायतें सुनाई दे रही हैं। एक यात्री लिखता है:

        “IndiGo cancelled my flight 12 hours before departure … Plan-B की कोई फ्लाइट नहीं — तीन दिन तक सफर करना पड़ा खुद से, महंगे दामों पर।” reddit.com

      • किसी ने कहा:

        “आज कोलकाता एयरपोर्ट पर पूरी अफरातफरी थी … शादी, परीक्षा, इंटरव्यू — सब बर्बाद। टिकट ₹7 हजार था, अगली फ्लाइट ₹40 हजार!” 

      • यात्रियों का गुस्सा सिर्फ IndiGo के ऊपर नहीं — एयरपोर्ट पर ground-staff, poor communication, refund delay, हेल्पलाइन बंद — इन सबके ऊपर है। कई लोग कह रहे हैं कि इस अनुभव के बाद वे फिर IndiGo से नहीं उड़ेंगे। 


🔎 क्यों यह सिर्फ “उड़ान रद्द” नहीं — यह भरोसे और ज़रूरतों का मसला है

      • याचिका में कहा गया है — हवाई सेवाएं अब सिर्फ “सलाहियत” नहीं रही; यह हमारी दैनिक ज़रूरत, आपातकाल, स्वास्थ्य, नौकरी-परीक्षा, पारिवारिक व सामाजिक ज़िम्मेदारियाँ सब संभालने का तरीका बन चुकी है। जब इतनी ज़रूरी सेवा अचानक बिगड़ जाए — तो यह सिर्फ असुविधा नहीं, “स्वास्थ्य, जीवन और नागरिक अधिकारों” से जुड़ा 문제 बन जाता है। 

      • कई लोगों के लिए यह सिर्फ यात्रा नहीं थी — जीवन-रक्षक मेडिकल ट्रांसफर, अंग प्रत्यारोपण, पारिवारिक आपात आवश्यकताएं थीं। इसीलिए याचिका में मांग है — भविष्य में ऐसा न हो, passengers का सुरक्षा-जाल बने।

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